बहुजन महामानव लेबल असलेली पोस्ट दाखवित आहे. सर्व पोस्ट्‍स दर्शवा
बहुजन महामानव लेबल असलेली पोस्ट दाखवित आहे. सर्व पोस्ट्‍स दर्शवा

शुक्रवार, १० ऑगस्ट, २०१२

श्रीकृष्ण



      कृष्ण असुर था और बामनो का कट्टर दुश्मन था . इसलिए बामन लोग कृष्ण की नफरत करते थे . इसी नफरत के चलते बामनो ने महाभारत और गीता लिखी . "महाभारत" के माध्यम से बामनो ने "कृष्ण को बदनाम" किया और "गीता" के माध्यम से बामनो ने "कृष्ण का बामनीकरन" किया . महाभारत में बामनो ने कृष्ण को बदफैली और अय्याशी दिखाया ; उसको गोपियों के पीछे लगनेवाला और महिलाओ को छेड़ने वाला मजनू दिखाया , उसकी 16000 बिबिया दिखाई. यह सब इसलिए बामनो ने लिखा , ताकि कृष्ण का मजाक उड़ाया जा सके .
       कृष्ण पक्का बामन विरोधी था , लेकिन गीता के माध्यम से बामनो ने उसे बामनवादी दिखाया और कृष्ण को माध्यम बनाकर भारत में बामनवाद को मजबूत किया . OBC लोग जो कृष्ण को मानते है , वोह लोग बामनो के गुलाम है , क्योंकि बामनो ने उनको कृष्ण के माध्यम से गुलाम बनाया है . अगर उन्हें बामनो की गुलामी से आजाद करना है , तो पहले हमे कृष्ण को बामनो की कैद से आजाद करना होगा .
       कृष्ण को बामनो की कैद में बंदिस्त करनेवाले " महाभारत और गीता " यह दो ग्रन्थ है . इन् दो ग्रंथो के माध्यम से बामनो ने कृष्ण का चारित्र्य हनन किया है. जब तक कृष्ण को मानने वाले लोग इन् दो ग्रंथो का कड़ा विरोध नहीं करते , और बामनो के चंगुल से कृष्ण को आजाद नहीं करते . तबतक कृष्ण के साथ न्याय नहीं होगा . सिर्फ बामनो के इशारो पर कृष्ण जन्मास्टमी को नाचना केवल मुर्खता होगी ; और कुछ नहीं .
       श्री कृष्ण मूलनिवासी थे और विदेशी बामनो के कट्टर विरोधी थे . बामनो की विषमता को नस्त्त करने के लिए उन्होंने "गोपाल काला " का प्रयोजन शुरू किया था . गोपाल काला में सभी जाती और वर्णों के लोग आपसी भेद भुलाकर एकसाथ खाना खाते थे .यह आपसी भाईचारा बढाने का और बामन वाद को कम करने का श्री कृष्ण का एक प्रयास था .
      बामन लोग मूलनिवासी बहुजन लोगो को कमजोर करने के लिए उनकी गाये काटकर खाते थे . उस ज़माने में जानवर ही सबसे बड़ी संपत्ति थी और बामन उसी सम्पति को यज्ञ के नाम पर तबाह करते थे . इसलिए कृष्ण ने गाय को और दूध दही को महत्व दिया था .इसलिए गाय को हमेशा कृष्ण के साथ दिखाते है और कृष्ण को हमेशा दही पिटे दिखाते है .
      बामन लोग मूलनिवासी लोगो पर बहुत अत्याचार करते थे . बामनो के सेनापति को "इन्द्र" कहते थे . इन्द्र हर साल मूलनिवासी बहुजनो से खंडनी वसूल करता था और सभी बामनो में बांटता था ....उस खंडनी को " नैवेद्य " कहते थे . अगर मूलनिवासी कितना भी गरीब क्यों हो , कभी कभी उसे अपनी जमींन , घर या खुद की बेटी भी बेचनी पड़ती थी ; लेकिन "नैवेद्य " देना जरुरी था . नहीं तो बामन इन्द्र उसको तडपा कर मारते थे . श्रीकृष्ण ने मूलनिवासीयो के इस शोषण का कडा विरोध किया था . उन्होंने इन्द्र को जानेवाला नैवेद्य को रोक दिया और अपने मूलनिवासी समाज में ही उसको बाँटना शुरू किया . इससे गुस्सा होकर इन्द्र ने कृष्ण पर हमला किया , लेकिन कृष्ण ने मूलनिवासी यो की मदत से बामन इन्द्र को हरा दिया . इन्द्र और कृष्ण के बीच की लड़ाई को बामनो ने कालपनिक रूप में इस तरह पेश किया है ---इन्द्र ने कृष्ण और उनके साथियों पर बारिश को बौछार की, लेकिन कृष्ण और उनके साथियों ने उंगली पर पर्वत उठाकर बामनो का सामना किया और उनको पराजित किया .
      इस कहानी का अर्थ यह है की , कृष्ण ने सभी मूलनिवासी यो को इक्कट्ठा किया और बामनो से लड़ाई की . उन्होंने ने उंगली पर पर्वत उठा लिया , इसका मतलब यह है की, बामनो को पराजित करने के लिए सिर्फ उंगली भर की ताकत ही काफी है . अगर सारे मूलनिवासी सिर्फ अपनी उंगली भर की ताकत का ही इस्तेमाल करते है , तो हम विदेशी बामनो को आसानी से हरा सकते है . यह मेसेज कृष्ण ने हमको दिया है . तो सभी मूलनिवासी बहुजन लोग श्री कृष्ण का अनुसरण करने के लिए "बामसेफ और भारत मुक्ति मोर्चा" में शामिल हो जाओ ....हमारे महापुरुष कृष्ण ने जैसे विदेशी बामनो को हरा दिया था , वैसे ही हम भी बामनो को हरा देंगे और हमारे देश से उन्हें भगा देंगे ....जय मूलनिवासी , भागो बामन विदेशी !!!
Powered By Blogger

मी लिहित असलेले लेख योग्य आहेत का? आपल्या प्रतिक्रिया कळवा.